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संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 24 फरवरी को रूस-यूक्रेन युद्ध के चार साल पूरे होने पर एक अहम प्रस्ताव पास किया है। 107 सदस्यों ने इसके समर्थन में वोट दिया है, लेकिन भारत वोटिंग में शामिल नहीं हुआ। |
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संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 24 फरवरी को रूस-यूक्रेन युद्ध के चार साल पूरे होने पर एक अहम प्रस्ताव पास किया है। 107 सदस्यों ने इसके समर्थन में वोट दिया है, लेकिन भारत वोटिंग में शामिल नहीं हुआ। |
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रूस और यूक्रेन की जंग अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है, जहां से दुनिया की 'एनर्जी सप्लाई' पर खतरा मंडराने लगा है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक ऐसा आदेश दिया है जिसने भारत की भी धड़कनें बढ़ा दी हैं. पुतिन ने ब्लैक सी नीचे से गुजरने वाली गैस और तेल की पाइपलाइनों की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने की प्लानिंग कर ली है. वही रास्ता है जहां से भारत की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा यानी कच्चा तेल होकर गुजरता है. |
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रूस की खुफिया एजेंसी ने दावा किया है कि ब्रिटेन और फ्रांस यूक्रेन को गोपनीय तरीके से परमाणु हथियार देने की योजना बना रहे हैं। यह दावा रूस-यूक्रेन युद्ध के चार साल पूरे होने पर आया है। |
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रूस की एक इंटेलिजेंस एजेंसी ने बड़ा दावा किया है। इंटेलिजेंस एजेंसी ने कहा है कि ब्रिटेन और फ्रांस यूक्रेन को न्यूक्लियर हथियार ट्रांसफर करने की प्लानिंग कर रहे हैं। रशियन फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विस (SVR) ने यह दावा किया है। |
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Russia Ukraine War: रूसी खुफिया एजेंसियों के अनुसार जर्मनी ने यूक्रेन की मदद के लिए परमाणु हथियार भेजने में मदद करने से इनकार कर दिया. रूस ने आईएईए से मामले की जांच की मांग की. |
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रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी, 2022 यानी बीते चार साल से युद्ध चल रहा है। रूस के आक्रमण का सामना करने के लिए यूक्रेन को अमेरिका और दूसरे यूरोपीय देशों से लगातार मदद मिल रही है। |
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रूस-यूक्रेन युद्ध के चार साल पूरे होने पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूक्रेन के प्रति अटूट समर्थन दोहराया। उन्होंने रूस को आक्रामक बताया, 15,000 नागरिक मौतों और भारी रूसी सैन्य हताहतों का दावा किया। यूरोप ने 170 अरब यूरो सहायता दी है और... |
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24 फरवरी 2026, रूस-यूक्रेन युद्ध की चौथी बरसी पर यूक्रेन ने रूस के ऊर्जा ढांचे पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है. लंबी दूरी के ड्रोन रूस के भीतर 1,200 किलोमीटर गहराई तक घुस गए और तातारस्तान इलाके के कलेकिनो तेल पंपिंग स्टेशन को धमाकों से दहला दिया. ‘ड्रुज़्बा’ पाइपलाइन का यह सबसे अहम हब अब आग और मलबे में तब्दील हो चुका है. इस हमले से सीधा असर हंगरी और स्लोवाकिया पर पड़ा है. हंगरी को यहां से उसकी जरूरत का 85 प्रतिशत तेल मिलता था, जबकि स्लोवाकिया का शत-प्रतिशत तेल सप्लाई इसी स्टेशन से होता था. हमले के बाद गुस्साए स्लोवाकिया ने यूक्रेन को बिजली की सप्लाई बंद कर दी है. स्लोवाकिया यूक्रेन को उसकी जरूरत की लगभग 18 प्रतिशत बिजली देता था. यह हमला युद्ध को ऊर्जा मोर्चे पर और ज्यादा खतरनाक बना रहा है. |
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रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध आज पांचवें साल में प्रवेश कर गया। दोनों देशों की कई गलतफहमियों को उजागर किया। रूसी सेना की अजेय छवि टूटी, तो संघर्ष ने यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था और वैश्विक शक्ति संतुलन को भी बदला। |
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रूस, यूक्रेन युद्ध और CREA रिपोर्ट के अनुसार रूस का तेल एक्सपोर्ट पाबंदियों के बावजूद बढ़ा, चीन, भारत, तुर्की मुख्य खरीदार बने हैं. |