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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान WhatsApp ने कहा कि वह यूजर्स का डाटा Meta के साथ शेयर नहीं करता और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से प्राइवेसी सेफ रखता है। यह मामला 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़े बड़े कानूनी विवाद से जुड़ा है।, Gadgets Hindi News - Hindustan

Whatsapp: इंस्टैंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया कि यह कहना सही नहीं है कि वह यूज़र्स का डेटा दूसरी Meta कंपनियों के साथ साझा कर रहा है.

Meta की AI सेफ्टी इंजीनियर का OpenClaw एजेंट बेकाबू होकर 200 से ज्यादा Gmail ईमेल डिलीट कर बैठा, जबकि उसे कन्फर्मेशन लेने का निर्देश दिया गया था। ऐसे में AI पर भरोसा करने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। , Gadgets Hindi News - Hindustan

यूजर डेटा शेयरिंग को लेकर WhatsApp को सुप्रीम कोर्ट के आगे झुकना पड़ा. कंपनी की तरफ से कहा गया है कि वो CCI के निर्देशों का पालन करेगी. दरअसल ये मामला WhatsApp का डेटा पेरेंट कंपनी मेटा के साथ शेयरिंग को लेकर है.

WhatsApp पर किसने ब्लॉक किया है, अब इसको आप Meta AI की मदद से जान सकते हैं. इसके लिए बस आपको सामने वाले की चैट में जाकर @Meta AI लिखकर मैसेज भेजना है. अगर Meta का जवाब न मिले, तो समझो आप ब्लॉक हैं. फोन बंद होने पर भी यह ट्रिक काम करती है.

क्या आपको पता है आप सिर्फ एक Hi लिखकर जान सकते हैं कि WhatsApp पर किसने आपको ब्लॉक किया है और किसने नहीं। हालांकि इसके लिए Meta AI की मदद लगेगी, लेकिन तरीका बहुत आसान है। आपको सिर्फ Meta AI को टैग करके Hi मैसेज भजेना होगा। इतना करते ही आपका काम हो जाएगा।

Facebook Messenger: Meta ने बड़ा फैसला लेते हुए Messenger की स्वतंत्र वेबसाइट को बंद करने की घोषणा की है. अप्रैल 2026 के बाद यूजर messenger.com के जरिए चैट नहीं कर पाएंगे.

Meta Glasses की मदद से शख्स कोर्ट रूम की रिकॉर्डिंग कर रहा था, जिसपर जज भड़क उठे और तुरंत वीडियो डिलीट करने को कहा. वह शख्स मार्क जबरबर्ग की गवानी को रिकॉर्ड कर रहा था.

एआई इंपैक्ट समिट में सुंदर पिचाई से लेकर ओपन एआई और एंथ्रॉपिक तक के सीईओ मौजूद थे, लेकिन मार्क जकरबर्ग नहीं थे. दरअसल मार्क जकरबर्ग की तरफ से भारत में एलेग्जेंडर वांग आए थे जो Meta के Superintelligence Team के हेड हैं. ये दुनिया के चुनिंदा यंगेस्ट अरबति में भी गिने जाते हैं.

अदालत में Mark Zuckerberg से काफी टफ सवाल पूछे गए. मामला यह है कि क्या सोशल मीडिया ऐप्स को जानबूझकर इस तरह बनाया गया था कि बच्चे और टीनेजर्स उन पर ज्यादा से ज्यादा टाइम बिताएं.  वकीलों ने सीधे पूछा कि क्या Meta चाहता था कि लोग उसके ऐप्स के आदी बन जाएं.