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बेलपत्र भोलेनाथ का प्रिय है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि बेलपत्र हमारे शरीर के लिए भी जादुई है, खासकर पाचन, मधुमेह और इम्युनिटी के लिए. लोकल 18 से बात करते हुए सुल्तानपुर के आयुष चिकित्सक डॉ. हर्ष बताते हैं कि सुबह खाली पेट 2-3 ताजी पत्तियां चबाने से कब्ज, पेट के कीड़े, दस्त और एसिडिटी दूर होती है, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. यह ब्लड शुगर, उच्च रक्तचाप (BP) और हृदय स्वास्थ्य को भी नियंत्रित करता है. डॉ. हर्ष कहते हैं कि बेलपत्र शरीर के तीन दोषों वात, पित्त और कफ तीनों को शांत करता है. - Uttar Pradesh News:bael leaves benefits sultanpur ayush doctor harsh

Cinnamon Health Benefits: लकड़ी की तरह दिखने वाला यह मसाला सही मात्रा और सही तरीके से लेने पर ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में मदद कर सकती है।

रोजे में खाने के बीच लंबा अंतराल शरीर के अंदर पाचन तंत्र में बदलाव ला सकता है, जो डायबिटीज मरीजों के लिए समस्या पैदा कर सकता है. रोजे के दौरान शुगर स्तर में काफी बदलाव आ जाता है. इससे मरीज को हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है. यह अचानक ब्लड शुगर कम होने का संकेत होता है और मरीज बेहोश हो सकता है. लोकल 18 ने इस बारे में अलीगढ़ के डायबिटीज स्पेशलिस्ट डॉ. हामिद अशरफ से बात की. वे बताते हैं कि अगर रमजान में डायबिटीज मरीज रोजे रख रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखें. ऐसा करना क्यों जरूरी है, आइये जानते हैं. - ramadan fasting diabetic patients aligarh diabetes specialist dr hamid ashraf

Lack of Fibre and Health Problems: मशहूर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शुभम वत्स ने चेतावनी दी है कि 70% भारतीय पर्याप्त फाइबर नहीं खा रहे हैं, जिससे कब्ज, फैटी लिवर और डायबिटीज जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. हमारे शरीर को रोज 25 से 30 ग्राम फाइबर की जरूरत होती है. फाइबर का सही संतुलन शुगर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए भी जरूरी है.

कैलिफोर्निया की रजिस्टर्ड डाइटीशियन और सर्टिफाइड डायबिटीज केयर एंड एजुकेशन स्पेशलिस्ट डॉन मेनिंग के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों को कुछ खास सप्लीमेंट्स का सेवन करने से बचना चाहिए।

दिनभर थकान महसूस होना हाई ब्लड शुगर का संकेत हो सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 

आजकल 20-50 की उम्र के युवाओं में कई गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिसके पीछे लाइफस्टाइल जिम्मेदार है।

Skin Tags and Diabetes Risk: मारेंगो एशिया हॉस्पिटल के एंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉक्टर पारस अग्रवाल के मुताबिक गर्दन पर निकलने वाले स्किन टैग्स इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकते हैं. अगर किसी व्यक्ति को इस तरह के मस्से नजर आ रहे हैं, तो उसे HbA1c और ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट कराना चाहिए. अगर ये टेस्ट नॉर्मल आएं, तब भी लाइफस्टाइल और खानपान सुधारना चाहिए. अगर आपका वजन ज्यादा है, तो वजन कम करने से इंसुलिन रेजिस्टेंस कम हो सकता है.

Lifestyle Changes for Diabetes: डायबिटीज की बीमारी से दुनिया की एक बड़ी आबादी पीड़ित है. भारत में भी इसके काफी मरीज हैं. चलिए आपको बताते हैं कि क्या इसकी दवा बंद की जा सकती है या नहीं.

एक नई रिसर्च से पता चला है कि ज्यादा ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में डायबिटीज का खतरा काफी कम होता है।