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अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने रविवार को ऐलान किया कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण पैदा हुए तेल संकट से निपटने के लिए स्ट्रेटजिक ऑयल रिजर्व को तुरंत जारी किया जाएगा। इस ऐलान के बावजूद आज ब्रेंट क्रूड 102.68 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 97.59 डॉलर प्रति बैरल पर था।, Business Hindi News - Hindustan

Gen Z का ब्यूटी एंड पर्सनल केयर से जुड़ाव लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत के कुल बीपीसी बाजार में इस समूह की हिस्सेदारी लगभग 19 अरब डॉलर होने का अनुमान है। इस पीढ़ी की हर दूसरी महिला अपनी आय का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बीपीसी उत्पादों पर खर्च करती है।, Business Hindi News - Hindustan

IEA Reserve Oil: आईईए दुन‍िया के तेल बाजार में 40 करोड़ बैरल तेल डालने वाला है। इसके जरिये वह तेल के उबलते बाजार को ठंडा करना चाहता है। हालांकि, एसएंडपी ग्‍लोबल एनर्जी ने चेतावनी दी है कि होर्मुज ताला खोले बगैर यह शायद ही किसी काम आएगा। होर्मुज के खुलने पर ही स्थिति सामान्‍य होगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक भारत के ब्यूटी और पर्सनल केयर (BPC) बाजार में Gen Z की हिस्सेदारी लगभग 19 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है. Gen Z की हर दो में से एक महिला अपने डिस्पोजेबल इनकम का 20% से ज्यादा ब्यूटी और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स पर खर्च करती है.

Success Story: गरीबी और अंधेरे कमरों की तंगहाली किसी के सपनों को नहीं मार सकती, यह साबित कर दिखाया है जमशेदपुर की मंजू देवी ने. कभी पार्लर में काम कर घर चलाने वाली मंजू ने आज जूट पेंटिंग के जरिए अपनी पहचान सात समंदर पार तक पहुंचा दी है. उनका संघर्ष तब शुरू हुआ जब वे लालटेन की रोशनी में कला के रंग उकेरती थीं, लेकिन आज उनकी सालाना कमाई लाखों में है. मंजू देवी की सफलता का राज उनकी रचनात्मकता है. वे जूट से बने बैग, बॉटल होल्डर और कॉर्पोरेट डायरी सेट पर झारखंड की पारंपरिक सोहराय पेंटिंग उकेरती हैं. जूट के उत्पादों पर लोक संस्कृति का यह फ्यूजन कॉरपोरेट जगत और विदेशी ग्राहकों को खूब आकर्षित कर रहा है. पार्लर की नौकरी छोड़ स्वयं सहायता समूह से जुड़कर हुनर सीखने वाली मंजू अब एक सफल उद्यमी हैं. उनके बनाए उत्पाद न केवल स्थानीय बाजारों बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों की भी शोभा बढ़ा रहे हैं. मंजू देवी का यह सफर उन सभी महिलाओं के लिए मिसाल है जो सीमित संसाधनों में बड़ा लक्ष्य पाना चाहती हैं.

Success Story: सफलता अक्सर प्रेरणा की मोहताज होती है. बेगूसराय की 12 जीविका दीदियों ने इसे सच कर दिखाया है. मशहूर 'लिज्जत पापड़' की कहानी से प्रेरित होकर सदर प्रखंड की इन महिलाओं ने अपना खुद का पापड़ उद्योग शुरू किया. जो आज जिले की पहचान बन चुका है. महज एक संकल्प से शुरू हुआ यह सफर आज 40 किलो प्रतिदिन की बिक्री तक पहुंच गया है. ममता देवी और रोशन देवी के नेतृत्व में यह समूह मूंग और उड़द दाल की सफाई से लेकर प्रोसेसिंग तक का काम खुद संभालता है. खास बात यह है कि यूनिट को सोलर एनर्जी से जोड़कर दीदियों ने बिजली का खर्च घटाया और अपनी बचत बढ़ा ली है. आज इन दीदियों के पापड़ की मांग सरकारी दफ्तरों की कैंटीन से लेकर शादियों और स्थानीय बाजारों तक है. रोजाना 5 से 6 हजार रुपये की सेल के साथ, समूह की प्रत्येक महिला हर महीने 10 हजार रुपये से अधिक की शुद्ध कमाई कर रही है. यह कहानी साबित करती है कि अगर सामूहिक शक्ति और सही तकनीक (सोलर) का मेल हो, तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भरता का नया इतिहास लिख सकती हैं.